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सिंगापुर में समलैंगिकता कानून हुआ पास,वार्षिक नेशनल डे पर हुआ ऐलान

Adarsh Bharat Team | Nishu Malik

Updated on : August 23, 2022


सिंगापुर में समलैंगिकता कानून हुआ पास,वार्षिक नेशनल डे पर हुआ ऐलान


 ब्रिटिश औपनिवेशिक युग से विरासत में मिली सिंगापुर की दंड संहिता की धारा 377A पुरुषों के बीच सेक्स के मामले में दो साल तक की जेल की सजा का प्रावधान करती है. अब इसे खत्म किया जाएगा. लेकिन ये बदलाव सीमित रहेगा और विवाह के नियमों को नहीं बदला जाएगा.

न्यूज एजेंसी एपी की खबर के मुताबिक सिंगापुर ने रविवार को घोषणा की है कि विवाह के पारंपरिक मानदंडों की रक्षा करते हुए औपनिवेशिक युग के कानून को निरस्त करके पुरुषों के बीच सेक्स को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा. वार्षिक नेशनल डे पर रैली में अपने भाषण के दौरान सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कहा कि उनका मानना ​​​​है कि इसे अभी करना सही है क्योंकि अधिकांश सिंगापुरी अब इसे स्वीकार करेंगे.

उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से वयस्कों के बीच निजी यौन संबंध कानून और व्यवस्था का कोई मुद्दा नहीं पैदा करता है. इसके लिए लोगों पर मुकदमा चलाने और न ही इसे अपराध बनाने का कोई औचित्य है. ली ने कहा कि समलैंगिक सेक्स को अपराध घोषित करने वाले कानून को खत्म किया जाएगा और सिंगापुर के पारंपरिक परिवार और सामाजिक मानदंडों पर इसका कोई असर होगा. धारा 377ए को सावधानी से निरस्त किया जाएगा. सिंगापुर में 1930 के दशक में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के तहत दंड संहिता की धारा 377A को लागू किया गया था.

सिंगापुर पर ब्रिटिश शासन 1963 में समाप्त हो गया, जब सिंगापुर मलेशिया का एक राज्य बन गया. यह दो साल बाद आजाद हो गया  लेकिन ब्रिटिशकालीन दंड संहिता को बरकरार रखा गया, जिसमें पुरुषों के बीच यौन संबंधों पर दो साल तक की जेल की सजा का कानून है. समलैंगिक पुरुषों का कहना है कि ये कानून उनके सिर पर लटकती हुई तलवार है और उनके साथ भेदभाव करता है. एलजीबीटीक्यू समुदाय के समर्थन में हर साल हजारों कार्यकर्ता सिंगापुर में पिंक डॉट के नाम से एक रैली करते हैं.

 

 



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